उन्होंने कहा कि अब तो 'नो न्यूज़ भी फ़ेक न्यूज़ है.'
एक पैनल में चर्चा के दौरान रवीश कुमार ने कहा, "असली ख़बरों के बजाए आप कुछ और पढ़ रहे हैं. क़ाबिल पत्रकारों के हाथ बांध दिए गए हैं. अगर क़ाबिल पत्रकारों का साथ दिया गया तो वो ही इस लोकतंत्र को बदल देंगे. लेकिन भारत का मीडिया, बहुत होश-हवास में, सोच समझकर भारत के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है. अख़बारों के संपादक, मालिक इस लोकतंत्र को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. समझिए किस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफ़रत की बातें हो रही हैं."
इसी चर्चा में हिस्सा ले रहे थे पूर्व आईएएस अधिकारी तनवीर जफ़र अली.
उन्होंने कहा, "फ़ेक न्यूज़ से हिंसा हो रही है. ये स्टेट के ख़िलाफ़ अपराध है. इसे रोकने के लिए सख़्त क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत है."
इससे पहले कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग फ़ेक न्यूज़ को बढ़ावा दे रहे हैं, वो देशद्रोही हैं.
उन्होंने कहा कि ये प्रोपेगैंडा है और कुछ लोग इसे बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.
अखिलेश ने कहा, "फ़ेक न्यूज़ एक वायरस की तरह है जिससे पूरा का पूरा देश कभी कभी पीड़ित हो जाता है. इससे लोगों की जान भी चली जाती है, ये कहना भी ग़लत नहीं होगा."
यादव ने कहा, "इस तरह के प्रचार पहले भी होते रहे हैं, हिटलर और मुसोलिनी के ज़माने भी झूठा प्रचार हो रहा था. आज हर व्यक्ति ब्रॉडकास्टर हो सकता है, कहीं से भी ख़बर को कहीं तक भी पहुंचा सकता है. ग़लत सूचना देना या हेरफेर करके सूचना देना भी फ़ेक न्यूज़ ही है."
उन्होंने कहा, "मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि जिस समय समाजवादी सरकार थी उस समय एक तस्वीर वायरल की जाती थी- ट्रक से एक पुलिसकर्मी की जान जाने की तस्वीर. मैंने गृहसचिव से उस तस्वीर के वायरल होने का सोर्स पता करने के लिए कहा. पता चला गुड़गांव की मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली एक लड़की उस झूठी ख़बर को फैला रही थी. मुझसे ग़लती हुई कि मैंने उसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई क्योंकि इससे उसका परिवार प्रभावित हो सकता था. आज मुझे उस लड़की को सज़ा न दिलवाने का अफ़सोस होता है."
बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, "जहां तक दूसरे दल से गठबंधन का सवाल है, बहुत से दल नहीं चाहेंगे कि गठबंधन हो, उनकी कोशिश होगी कि ये दो विचारधाराएं न मिल जाएं. डॉक्टर लोहिया की समाजवादी विचारधारा और डॉक्टर आंबेडकर की विचारधारा एक न हो. लेकिन हमारी कोशिश होगी कि समाज में जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, जो सबसे ज़्यादा दुख में रह रहे हैं, शायद हम उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ पाएं तो हम कामयाब होंगे. समाजवादी लोग विकास करके जनता को जीतना चाहते हैं, बकवास करके नहीं. हमारी विचारधारा के क़रीब जो लोग होंगे उनका सहारा ज़रूर लिया जाएगा."
No comments:
Post a Comment