Thursday, December 27, 2018

मोदी-शाह की मजबूरी है सहयोगी दलों के आगे झुकना?: नज़रिया

बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को हमेशा दो स्वरूपों में देखा है - पहले, जो एनडीए के चुनावी आंकड़ों में इज़ाफा करते हैं और दूसरे, जो भारतीय राजनीति की मुख्य धुरी के रूप में उसकी पहचान मजबूत करते हैं.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिन्दी बहुल क्षेत्रों में करारी हार के बाद हिन्दूवादी पार्टी के दृष्टिकोण में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं.

एनडीए सहयोगियों के शब्दबाण तीखे हो चले हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को उनकी कड़वाहट झेलने को मजबूर होना पड़ा है.

मोदी और शाह, दोनों नए सिरे से गठबंधन का ताना-बाना बुनने में जुटे हैं, जो उनके पुराने तौर-तरीकों के लिए एक चुनौती से कम नहीं.

2014 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने और उसके बाद कई विधानसभा चुनावों में लगातार जीत के बाद बीजेपी को महसूस होने लगा था कि पूरी राजनीति के केन्द्र में नरेंद्र मोदी को रखना ही काफी है और उनके लिए सहयोगियों की फुसफुसाहट कोई मायने नहीं रखती.

लेकिन मोदी और शाह को ये बात समझ में आ गई है कि बीजेपी के लिए अपने एनडीए सहयोगियों को खोना तुलनात्मक दृष्टि से ज़्यादा खराब है, बजाय इसके कि लोकसभा चुनाव के लिए अधिक सीटों की मांग करनेवाले दलों के सामने पूरी तरह असहाय हो जाना.

बीजेपी को चुनाव से पहले और चुनाव के बाद, दोनों ही स्थितियों में सहयोगियों की ज़रूरत है, क्योंकि आत्मविश्वास से लबरेज़ राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष प्रदेश स्तर पर विशिष्ट गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रहा है.

अमित शाह अब भी मान रहे हैं कि शिवसेना एनडीए का सहयोगी है और बीजेपी उसके साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी, जबकि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे स्पष्ट कर चुके हैं कि वो अकेले बूते पर चुनावी जंग लड़ेंगे.

इसी प्रकार बीजेपी को राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की भारी-भरकम मांग मानने से भी परहेज नहीं, जबकि हक़ीक़त के धरातल पर पार्टी के प्रभाव और नेताओं के दावों में ज़मीन-आसमान का अंतर है.

मौजूदा हालात में बीजेपी के लिए मोदी की आलोचक शिवसेना को गठबंधन से दूर जाने देना मुमकिन नहीं दिखता क्योंकि एन चन्द्रबाबू नायडू की टीडीपी और उपेन्द्र कुशवाहा पहले ही गठबंधन से किनारा कर चुके हैं.

इसी प्रकार अगर पासवान और उनके बेटे को एनडीए से नाता तोड़ना पड़ता तो ये राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के लिए भारी क्षति होती.

लिहाज़ा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) के साथ बराबरी के आधार पर सीटों का समझौता करने वाली बीजेपी के लिए एलजेपी की मांगों के सामने झुकना मजबूरी है.

Tuesday, December 18, 2018

वन विहार में छह साल से नहीं हुई बाघाें की ब्रीडिंग, अब किए जा रहे है फिर से प्रयास

वन विहार में पिछले छह साल को बाघों की कोई ब्रीडिंग नहीं हुई है। जबकि प्रदेश के दो चिड़ियाघर में बाघिनों ने न केवल सफलतापूर्वक ब्रीडिंग की बल्कि उन्होंने शावकों को जन्म देकर उनका बेहतर पालन पोषण कर रही है। हालांकि इस मामले में वन विहार प्रबंधन का कहना है कि पहले बूढ़े बाघ होने के कारण ब्रीडिंग प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया था। अब पार्क में युवा बाघ है इसलिए बांधवगढ़ से आई आदमखोर बाघिन और बांधव के बीच ब्रीडिंग कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ।

वन विहार प्रबंधन इन दिनों बाघों की ब्रीडिंग करने की तैयारी कर रहा है। प्रबंधन दो बाघों पर सतत निगरानी रखे हुए है। यही नहीं उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दे रहा है। हाल ही में बांधवगढ़ नेशनल पार्क से आई आदमखोर बाघिन और बाघ बांधव को एक दूसरे के बाड़े के नजदीक रखा गया था। अब इनके बीच लगा परदा हटा दिया गया है। दोनों एक दूसरे को देखकर आक्रमक नहीं हुए, जिसको देखकर प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार ब्रीडिंग प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा।

वर्ष 2014 में बाघ कान्हा की मौत ने लगाया था विराम
वन विहार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने बाघों की ब्रीडिंग की अनुमति दी है, इसके बावजूद यहां पर पिछले छह साल में एक भी बाघ का जन्म नहीं हुआ है। वर्ष 2014 में वन विहार प्रबंधन ने कान्हा और गौरी और रिद्धी से भी ब्रीडिंग करने की कोशिश की थी, लेकिन कान्हा की मौत के बाद इस प्रोजेक्ट पर विराम लग गया। वहीं वर्ष 2010 में दो बार बाघ कान्हा और बाघिन बसनी की मेटिंग कराई गई। दोनों बार शावकों की मौत हो गई। इसके पूर्व भी प्रबंधन ने कान्हा और श्वेता की मेटिंग कराने के प्रयास किए थे। श्वेता की असमय मौत से अभियान सफल नहीं हो सका।

केवल श्वेता का हुआ था जन्म
वन प्रबंधन ने वर्ष 2003 में बाघ राम और सफेद बाघिन रीनी की ब्रीडिंग कराई थी, जिससे बाघिन श्वेता का जन्म हुआ था। श्वेता करीब आठ साल तक जीवित रही।

चिडिय़ाघरों में हो रही सफल ब्रीडिंग
वन विहार प्रबंधन ने जिस बाघ आक्रमक और आदमखोर मानकर इंदौर चिड़ियाघर को दिया था वहां के प्रबंधन ने उस बाघ से ब्रीडिंग कराई। उसकी संतान चिड़ियाघर में घूम रही है। जहां इंदौर चिड़ियाघर में हाल ही में बाघिन ने दो शावकों ने जन्म दिया। वहीं ग्वालियर के चिड़ियाघर में बाघिन जमुना ने शावकों को जन्म दिया है।

वन विहार में बाघों की ब्रीडिंग के प्रयास हो रहे है। पहले बूढ़े बाघ थे। हाल ही में वन विहार को युवा बाघ मिले है। उनके बीच ब्रीडिंग करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस बार बाघों की ब्रीडिंग का प्रोजेक्ट सफल रहेगा।

Friday, December 14, 2018

खड़गे बोले- राफेल पर माफी नहीं मांगेंगे राहुल गांधी, JPC से क्यों डरी सरकार

राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने जेपीसी गठित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी से माफी वाली बीजेपी की मांग को खारिज कर दिया. कांग्रेस ने बीजेपी को चुनौती दी कि अगर उन्हें लगता है कि इस मुद्दे पर राहुल ने कुछ गलत कहा है तो सत्ता पक्ष को उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस देना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. इसी फैसले का जिक्र करते हुए लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष से देश और संसद से माफी मांगने को कहा था.

सत्ता पक्ष की इस मांग के बारे में पूछे जाने पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद भवन परिसर न्यूज एजेंसी भाषा से में कहा, ‘माफी क्यों मांगें? हमने तो सदन में कहा है कि अगर उन्होंने झूठ बोला है तो सत्ता पक्ष विशेषाधिकार हनन नोटिस लाए’

खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान डील की कीमत तय करने पर कुछ नहीं बोला. यह तो एक जनहित याचिका थी, इसका हमसे कोई संबंध नहीं है. कांग्रेस नेता ने कहा कि हम इसे संसद में उठा रहे हैं जो देश की सर्वोच्च संस्था है.

उन्होंने ने कहा कि सरकार को संसद को यह बताना चाहिए कि वह इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) क्यों नहीं बनाना चाहते हैं? जेपीसी तो दोनों सदनों की होती है. पीआईएल के फैसले से यह नहीं कहा जा सकता कि कोई आरोपों से बरी हो गया. सुप्रीम कोर्ट तो केवल उन्हीं मुद्दों की जांच करेगा जो याचिका में उठाये गये हैं. वहीं जेपीसी मुद्दे की व्यापक जांच करेगी. सारी फाइलों पर गौर किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: राफेल पर SC के फैसले के बाद बदला संसद का सीन, लगे 'राहुल गांधी माफी मांगो' के नारे

लोकसभा में शुक्रवार को राफेल मुद्दे पर खड़गे कुछ बोलने के लिए खड़े हुए थे. लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें यह कहते हुए इजाजत नहीं दी कि पहले वह सदन में हंगामा और नारेबाजी कर रहे अपने दलों के सदस्यों को चुप करवायें.

इससे पहले पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं? उन्होंने कहा, "हमने पहले ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट राफेल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता क्योंकि नियमों के तहत उसका दायरा सीमित है, इसलिए हमने कोर्ट का रुख नहीं किया था.

Tuesday, December 11, 2018

华为CFO孟晚舟被捕和中美贸易谈判的幕后较量

上周六,在南美洲阿根廷首都布宜诺斯艾利斯出席G20峰会的习近平与特朗普共进晚餐。两个半小时的交流后,两人敲定中美贸易战暂时“停火”,以及接下来90天的谈判期限。

就在同一天,在北美洲的加拿大城市温哥华,总部设在深圳的世界最大电信设备制造商华为公司首席财务官(CFO)孟晚舟在转机时被当地警方逮捕。加拿大警察称,美国当局正在寻求引渡这位华为创始人千金。

24小时之内,发生了两件对中美关系意义重大却又意味不同的事情,其中的信号耐人寻味。

有分析人士认为,孟晚舟在中美90天谈判开始之际被扣押,从中可以看出美国在谈判中的重点关切,也显示出中美两国间存在的根本分歧。

凯源资本董事总经理陆修泉(Brock Silvers)在接受BBC中文采访时表示,孟晚舟被捕可以视作美国对技术问题关切的再一次体现。他认为,技术一直是美国的最大担忧,贸易问题是其次;而中国过去一直希望通过在贸易上展现灵活性换取美国在技术问题上的让步。如果G20峰会后的停火让中国人以为自己的战略奏效了,那么孟晚舟被捕或许会让北京感到“困惑”。

对比G20峰会后中国舆论的乐观,现在中国各方的言辞似乎激烈了不少。中国外交部要求加拿大和美国立即对羁押孟晚舟的理由作出澄清,同时将其立即释放;代表官方的《人民日报》海外版微信公众号“侠客岛”发表文章表示,今后美国在一些事情上的举动可能会更加“霸道、不可理喻”,中国对美国政府的任何承诺都要“谨慎对待,做两手准备”;《人民日报》旗下的《环球时报》总编辑胡锡进则发布微博称,“美国在市场上打不垮华为,请不要采取卑鄙的流氓手段”。

BBC驻上海记者白洛宾(Robin Brant)在节目中也提到,孟晚舟被捕并非针对个人或个别公司,而是美国司法部门向中国作出的“咄咄逼人”的举动。这一举动显示出美中两国在贸易问题上的意见分歧,且特朗普政府已不想继续容忍他们所认为的违反对伊朗制裁的行为。

Wednesday, November 21, 2018

मार्च तक बंद हो सकते हैं आधे से अधिक एटीएम

रेग्युलेटरी बदलावों के कारण देश में मार्च 2019 तक बैंकों के आधे से अधिक एटीएम बंद हो सकते हैं.

देश में अभी तकरीबन 2.38 लाख मशीनें हैं और इनमें से आधी बंद हो सकती हैं. एटीएम उद्योग परिसंघ (सीएटीएमआई) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि एटीएम के बंद होने से हज़ारों रोज़गार प्रभावित होंगे.

परिसंघ के मुताबिक, "सेवा प्रदाता देश भर में मार्च 2019 तक 1.13 लाख एटीएम बंद करने को मजबूर हो सकते हैं. इन आंकड़ों में क़रीब एक लाख बैंक शाखाओं से हटकर लगाये गये एटीएम तथा 15,000 से अधिक व्हाइट लेबल एटीएम शामिल हैं."

उद्योग संगठन ने कहा कि नकद प्रबंधन मानकों को अनिवार्य करने के साथ हार्डवेयर और साफ्टवेयर को उन्नत बनाने तथा नकदी डालने की 'कैसेट' अदला-बदली व्यवस्था समेत हाल में जो नियामकीय बदलाव किये गये हैं, उससे एटीएम का परिचालन व्यवहारिक नहीं रह जाएगा और नजीतन ये एटीएम बंद हो सकते हैं.

बयान के मुताबिक, जो एटीएम बंद हो सकते हैं, उनमें से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में हैं. ऐसे में कैश की कमी की वजह से इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी को यौन उत्पीड़न के मामले में क्लीन चिट मिल गई है. मामले की जांच में जुटी तीन सदस्यीय जांच समिति ने जौहरी को इस मामले में दोषी नहीं पाया है. पिछले महीने #MeToo मूवमेंट के तहत एक महिला ने जौहरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

जांच कमेटी ने दो महिलाओं की ओर से राहुल जौहरी पर लगाए गए आरोपों के ग़लत पाया है. इसलिए जांच कमेटी ने महिलाओं के सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. राहुल जौहरी को तीन हफ्ते पहले जबरन छुट्टी पर भेजा गया था. अब वे अपनी इच्छा पर कभी भी ज्वाइन कर सकते हैं. जांच कमेटी के एक सदस्य ने जेंडर सेंसिटिविटी काउंसिलिंग भी लेने को कहा है.

इस मामले में विनोद राय और पूर्व भारतीय महिला कप्तान डायना एडुल्जी ने बीसीसीआई की लीगल कमेटी के वरिष्ठ वकील के साथ 20 से 22 अक्‍टूबर तक इस मामले पर पर चर्चा की थी. इसके बाद एडुल्जी का सुझाव था कि जौहरी को या तो इस्तीफ़ा देना चाहिए या फिर उनका क़रार खत्म किया जाना चाहिए.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी सरकार जान-बूझकर संसद और सीबीआई जैसी संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है और ऐसा लोकतंत्र को कमज़ोर करने के प्रयासों के तहत किया जा रहा है.

बुधवार को इंदौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और मौजूदा हालात बदले नहीं गए तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी.

Monday, November 12, 2018

भारत का मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है : रवीश कुमार

उन्होंने कहा कि अब तो 'नो न्यूज़ भी फ़ेक न्यूज़ है.'

एक पैनल में चर्चा के दौरान रवीश कुमार ने कहा, "असली ख़बरों के बजाए आप कुछ और पढ़ रहे हैं. क़ाबिल पत्रकारों के हाथ बांध दिए गए हैं. अगर क़ाबिल पत्रकारों का साथ दिया गया तो वो ही इस लोकतंत्र को बदल देंगे. लेकिन भारत का मीडिया, बहुत होश-हवास में, सोच समझकर भारत के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है. अख़बारों के संपादक, मालिक इस लोकतंत्र को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. समझिए किस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफ़रत की बातें हो रही हैं."

इसी चर्चा में हिस्सा ले रहे थे पूर्व आईएएस अधिकारी तनवीर जफ़र अली.

उन्होंने कहा, "फ़ेक न्यूज़ से हिंसा हो रही है. ये स्टेट के ख़िलाफ़ अपराध है. इसे रोकने के लिए सख़्त क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत है."

इससे पहले कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग फ़ेक न्यूज़ को बढ़ावा दे रहे हैं, वो देशद्रोही हैं.

उन्होंने कहा कि ये प्रोपेगैंडा है और कुछ लोग इसे बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.

अखिलेश ने कहा, "फ़ेक न्यूज़ एक वायरस की तरह है जिससे पूरा का पूरा देश कभी कभी पीड़ित हो जाता है. इससे लोगों की जान भी चली जाती है, ये कहना भी ग़लत नहीं होगा."

यादव ने कहा, "इस तरह के प्रचार पहले भी होते रहे हैं, हिटलर और मुसोलिनी के ज़माने भी झूठा प्रचार हो रहा था. आज हर व्यक्ति ब्रॉडकास्टर हो सकता है, कहीं से भी ख़बर को कहीं तक भी पहुंचा सकता है. ग़लत सूचना देना या हेरफेर करके सूचना देना भी फ़ेक न्यूज़ ही है."

उन्होंने कहा, "मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि जिस समय समाजवादी सरकार थी उस समय एक तस्वीर वायरल की जाती थी- ट्रक से एक पुलिसकर्मी की जान जाने की तस्वीर. मैंने गृहसचिव से उस तस्वीर के वायरल होने का सोर्स पता करने के लिए कहा. पता चला गुड़गांव की मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली एक लड़की उस झूठी ख़बर को फैला रही थी. मुझसे ग़लती हुई कि मैंने उसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई क्योंकि इससे उसका परिवार प्रभावित हो सकता था. आज मुझे उस लड़की को सज़ा न दिलवाने का अफ़सोस होता है."

बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, "जहां तक दूसरे दल से गठबंधन का सवाल है, बहुत से दल नहीं चाहेंगे कि गठबंधन हो, उनकी कोशिश होगी कि ये दो विचारधाराएं न मिल जाएं. डॉक्टर लोहिया की समाजवादी विचारधारा और डॉक्टर आंबेडकर की विचारधारा एक न हो. लेकिन हमारी कोशिश होगी कि समाज में जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, जो सबसे ज़्यादा दुख में रह रहे हैं, शायद हम उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ पाएं तो हम कामयाब होंगे. समाजवादी लोग विकास करके जनता को जीतना चाहते हैं, बकवास करके नहीं. हमारी विचारधारा के क़रीब जो लोग होंगे उनका सहारा ज़रूर लिया जाएगा."