Thursday, January 17, 2019

华为任正非谈孟晚舟案:想女儿、无“后门”、特朗普“伟大”

向低调的华为创始人任正非,本周二(1月15日)罕见地接受国际媒体采访,他驳斥了华为参与间谍活动的指控。

任正非还说,非常想念自己的女儿孟晚舟。

孟晚舟是华为的首席财务官。去年12月初,因为美国指控她违反伊朗制裁禁令,要求引渡,孟晚舟在加拿大被捕,目前她获准保释,但必须留在加拿大。

华为是全球最大的电信设备制造,最近却在多个国家受到审查。

上周,华为一名销售主管在波兰被捕,当地政府指控他从事间谍活动。华为随即解雇了这名主管, 并否认他的任何违法行为是代表华为进行的。

此外,英国等在应用5G技术和建设通信基础设施时,也对使用华为的设备表达担忧。这些国家认为,华为可能向北京方面提供监控和干扰数据的方法。

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没有“后门”
这是任正非第三次与国际媒体进行此类采访,包括《金融时报》、《彭博社》和《华尔街日报》在内的六位记者受到邀请,上次采访要追溯到三年前。

外界对华为的诸多担忧中,任正非的背景常被提及——他于1978年加入共产党,还是解放军的退伍老兵。

这位已经74岁的企业家告诉记者,“我爱我的国家。我拥护中国共产党。但我不会做任何伤害这个世界的事情。我个人的政治信念也与华为的商业营运没有关系。”

他补充说,中国政府从未要求他或他的公司提供华为合作伙伴的“不适当的信息”。

“我个人永远不会损害客户的利益,我和我的公司也不会答应这样的要求,”他说。

另有质疑称华为可能让中国间谍直接获取数据,任正非驳斥,“中国没有任何法律要求任何一家公司安装强制性‘后门’”,而华为“从未发生严重的安全事件”。

澳大利亚战略政策研究所访问学者尤伦(Tom Uren)此前向BBC中文表示,外界担忧的根源是中国去年通过的《情报法》,该法第七条要求中国国内任何组织和公民要“依法支持、协助和配合国家情报工作”。

尤伦认为,中国政府可以按《情报法》要求华为与当局合作,“这样做的话,他们不会触犯澳洲任何法律,但仍可帮助中国情报组织的工作。因此,当中国公司在其他国家参与建设网络基础设施时,难以取信当地政府。

Wednesday, January 9, 2019

77% भारतीय अमीरों को आतंकवाद और 40% को पैसा चोरी होने का डर

देश के 77% अमीर आतंकवाद के बढ़ते खतरे को लेकर चिंतित रहते हैं। 73% अमीर साम्प्रदायिक तनाव, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सामाजिक-आर्थिक विषमता जैसे सामाजिक मुद्दों की चिंता करते हैं। वहीं, 40% अमीर ऐसे हैं, जिन्हें पैसा चोरी होने का डर सताता है।

अमीरों के तीन ग्रुप में हुआ सर्वे
ये आंकड़े इन्वेस्टमेंट सर्विसेज कंपनी आईआईएफएल की वेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट 2018 के जरिए सामने आए हैं। यह रिपोर्ट एक सर्वे के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें देश के टॉप-500 अमीरों से रायशुमारी की गई थी।

सर्वे के लिए देशभर के 500 अमीरों को तीन ग्रुप- हाई नेटवर्थ, वेरी हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल में बांटा गया। आतंकवाद के बाद इनकी सबसे बड़ी चिंता सामाजिक मुद्दे हैं। इनमें अंतर जातीय टकराव, महिला हिंंसा और गरीबों-अमीरों के बीच असमानता जैसी बातें शामिल हैं। 

52% अमीरों के लिए ट्रम्प भी चिंता का विषय
सर्वे में शामिल 52% भारतीय अमीरों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी चिंता का विषय हैं। भारतीय अमीर ये मानते हैं कि ट्रम्प की नीतियां अस्थिरता का कारण बन सकती हैं। 62 फीसदी अमीरों के लिए वर्तमान अस्थिरता परेशान करने वाला का विषय है क्योंकि इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

भारत-पाक संबंध, चीन का दक्षिण चीनी समुद्र में विस्तार होना और यूरोपियन यूनियन का टूटना भी भारतीय अमीरों को चिंतित करता है। 8 फीसदी अमीरों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों का असर भी भविष्य में भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। सर्वे में शामिल 5 फीसदी अमीरों के लिए अपनी कंपनी का उत्तराधिकारी चुनना भी कड़ी चुनौती है।

लोकसभा चुनाव के चलते अंतरिम बजट
जब लोकसभा चुनाव होते हैं, उस वर्ष वित्त मंत्री अंतरिम बजट पेश करते हैं। यह बजट कुछ महीनों के सरकारी कामकाज चलाने के लिए होता है। नई सरकार बनने के बाद जुलाई में अनुपूरक बजट पेश किया जाता है जोे बाकी के वित्त वर्ष के लिए होता है। अन्य वर्षों में वित्त मंत्री पूर्ण बजट पेश करते हैं।

इस बार अंतरिम बजट से उम्मीदें
चर्चा है कि इस बार मोदी सरकार मिडिल क्लास को राहत देते हुए आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है। आयकर में छूट के लिए निवेश की सीमा भी बढ़ाई जा सकती है।
कंपनी के रेवेन्यू और ऑपरेटिंग इनकम टार्गेट के आधार पर बोनस की रकम तय की जाती है। बीते वित्त वर्ष में एपल के रेवेन्यू में 16% का इजाफा हुआ था। एपल का फाइनेंशियल ईयर 29 सितंबर को खत्म होता है और 30 सितंबर से नया वित्त वर्ष शुरू होता है।

शेयरों से कुक की सबसे ज्यादा कमाई
कुक की कमाई का बड़ा हिस्सा एपल के शेयरों से आता है। उन्हें सालाना इन्क्रीमेंट के तौर पर शेयर मिलते हैं। इनकी संख्या एसएंडपी-500 की कंपनियों के मुकाबले एपल के शेयर की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होती है।

Tuesday, January 1, 2019

देश के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बन सकते हैं विराट, अब तक जीते हैं 26 टेस्ट; धोनी से सिर्फ एक कम

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने साल की शुरूआत नंबर-1 टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर की है। पिछले साल उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए। अब इस साल के पहले ही टेस्ट में उनके पास कई रिकॉर्ड की बराबरी करने और तोड़ने का मौका है। सिडनी में भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज का चौथा और आखिरी टेस्ट खेलेगा। विराट इस टेस्ट में यदि टीम इंडिया को जीत दिला देते हैं तो वे भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बराबरी कर लेंगे। इसके बाद भारत वर्ल्ड कप तक कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं खेलेगा, लेकिन उसके बाद यदि विराट की कप्तानी में टीम इंडिया एक भी मैच जीतती है तो वे देश के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बन जाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने वाले पहले कप्तान बन सकते हैं कोहली
धोनी ने 60 टेस्ट में भारतीय टीम की अगुआई की। इसमें से उन्होंने 27 में टीम को जीत दिलाई। वहीं, विराट अब तक 45 टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 26 टेस्ट जीते हैं। 3 जनवरी से होने वाले सिडनी टेस्ट को जीतते ही वे धोनी के साथ संयुक्त रूप से भारत के सबसे सफल कप्तान बन जाएंगे। 

विराट कोहली यदि सिडनी टेस्ट जीतते हैं या ड्रॉ भी करा लेते हैं तो वे ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बन जाएंगे। टीम इंडिया 1947 से ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही है, लेकिन अब तक खेली गई 11 टेस्ट सीरीज में वह एक भी नहीं जीत पाई है।

कोहली विदेश में टेस्ट जीतने के मामले में धोनी और राहुल द्रविड़ को पहले ही पीछे छोड़ चुके हैं। यदि वे सिडनी टेस्ट में टीम इंडिया को जीत दिला देते हैं तो सौरव गांगुली को भी पीछे छोड़ देंगे। गांगुली ने बतौर कप्तान विदेश में खेले गए 28 टेस्ट में 11 जीते थे।

दूसरी ओर, छह साल तक टेस्ट टीम की कप्तानी करने वाले धोनी ने विदेशी जमीन पर 30 टेस्ट में 6 ही जीते थे। वहीं, सौरव गांगुली के बाद कप्तान बनने वाले राहुल द्रविड़ ने 17 में पांच जीते थे। कोहली अब तक 24 टेस्ट में 11 जीत चुके हैं।

कोहली के पास इस टेस्ट में 26वां शतक लगाने का मौका होगा। अगर वे ऐसा कर लेते हैं तो ऑस्ट्रेलिया में उनके नाम 7 शतक हो जाएंगे। इस मामले में वे सचिन तेंडुलकर को पीछे छोड़ देंगे। सचिन ने 20 टेस्ट में ऐसा किया था। जबकि, कोहली 11 टेस्ट में ही उनके बराबर पहुंच चुके हैं।

Thursday, December 27, 2018

मोदी-शाह की मजबूरी है सहयोगी दलों के आगे झुकना?: नज़रिया

बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को हमेशा दो स्वरूपों में देखा है - पहले, जो एनडीए के चुनावी आंकड़ों में इज़ाफा करते हैं और दूसरे, जो भारतीय राजनीति की मुख्य धुरी के रूप में उसकी पहचान मजबूत करते हैं.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिन्दी बहुल क्षेत्रों में करारी हार के बाद हिन्दूवादी पार्टी के दृष्टिकोण में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं.

एनडीए सहयोगियों के शब्दबाण तीखे हो चले हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को उनकी कड़वाहट झेलने को मजबूर होना पड़ा है.

मोदी और शाह, दोनों नए सिरे से गठबंधन का ताना-बाना बुनने में जुटे हैं, जो उनके पुराने तौर-तरीकों के लिए एक चुनौती से कम नहीं.

2014 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने और उसके बाद कई विधानसभा चुनावों में लगातार जीत के बाद बीजेपी को महसूस होने लगा था कि पूरी राजनीति के केन्द्र में नरेंद्र मोदी को रखना ही काफी है और उनके लिए सहयोगियों की फुसफुसाहट कोई मायने नहीं रखती.

लेकिन मोदी और शाह को ये बात समझ में आ गई है कि बीजेपी के लिए अपने एनडीए सहयोगियों को खोना तुलनात्मक दृष्टि से ज़्यादा खराब है, बजाय इसके कि लोकसभा चुनाव के लिए अधिक सीटों की मांग करनेवाले दलों के सामने पूरी तरह असहाय हो जाना.

बीजेपी को चुनाव से पहले और चुनाव के बाद, दोनों ही स्थितियों में सहयोगियों की ज़रूरत है, क्योंकि आत्मविश्वास से लबरेज़ राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष प्रदेश स्तर पर विशिष्ट गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रहा है.

अमित शाह अब भी मान रहे हैं कि शिवसेना एनडीए का सहयोगी है और बीजेपी उसके साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी, जबकि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे स्पष्ट कर चुके हैं कि वो अकेले बूते पर चुनावी जंग लड़ेंगे.

इसी प्रकार बीजेपी को राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की भारी-भरकम मांग मानने से भी परहेज नहीं, जबकि हक़ीक़त के धरातल पर पार्टी के प्रभाव और नेताओं के दावों में ज़मीन-आसमान का अंतर है.

मौजूदा हालात में बीजेपी के लिए मोदी की आलोचक शिवसेना को गठबंधन से दूर जाने देना मुमकिन नहीं दिखता क्योंकि एन चन्द्रबाबू नायडू की टीडीपी और उपेन्द्र कुशवाहा पहले ही गठबंधन से किनारा कर चुके हैं.

इसी प्रकार अगर पासवान और उनके बेटे को एनडीए से नाता तोड़ना पड़ता तो ये राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के लिए भारी क्षति होती.

लिहाज़ा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) के साथ बराबरी के आधार पर सीटों का समझौता करने वाली बीजेपी के लिए एलजेपी की मांगों के सामने झुकना मजबूरी है.

Tuesday, December 18, 2018

वन विहार में छह साल से नहीं हुई बाघाें की ब्रीडिंग, अब किए जा रहे है फिर से प्रयास

वन विहार में पिछले छह साल को बाघों की कोई ब्रीडिंग नहीं हुई है। जबकि प्रदेश के दो चिड़ियाघर में बाघिनों ने न केवल सफलतापूर्वक ब्रीडिंग की बल्कि उन्होंने शावकों को जन्म देकर उनका बेहतर पालन पोषण कर रही है। हालांकि इस मामले में वन विहार प्रबंधन का कहना है कि पहले बूढ़े बाघ होने के कारण ब्रीडिंग प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया था। अब पार्क में युवा बाघ है इसलिए बांधवगढ़ से आई आदमखोर बाघिन और बांधव के बीच ब्रीडिंग कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ।

वन विहार प्रबंधन इन दिनों बाघों की ब्रीडिंग करने की तैयारी कर रहा है। प्रबंधन दो बाघों पर सतत निगरानी रखे हुए है। यही नहीं उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दे रहा है। हाल ही में बांधवगढ़ नेशनल पार्क से आई आदमखोर बाघिन और बाघ बांधव को एक दूसरे के बाड़े के नजदीक रखा गया था। अब इनके बीच लगा परदा हटा दिया गया है। दोनों एक दूसरे को देखकर आक्रमक नहीं हुए, जिसको देखकर प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार ब्रीडिंग प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा।

वर्ष 2014 में बाघ कान्हा की मौत ने लगाया था विराम
वन विहार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने बाघों की ब्रीडिंग की अनुमति दी है, इसके बावजूद यहां पर पिछले छह साल में एक भी बाघ का जन्म नहीं हुआ है। वर्ष 2014 में वन विहार प्रबंधन ने कान्हा और गौरी और रिद्धी से भी ब्रीडिंग करने की कोशिश की थी, लेकिन कान्हा की मौत के बाद इस प्रोजेक्ट पर विराम लग गया। वहीं वर्ष 2010 में दो बार बाघ कान्हा और बाघिन बसनी की मेटिंग कराई गई। दोनों बार शावकों की मौत हो गई। इसके पूर्व भी प्रबंधन ने कान्हा और श्वेता की मेटिंग कराने के प्रयास किए थे। श्वेता की असमय मौत से अभियान सफल नहीं हो सका।

केवल श्वेता का हुआ था जन्म
वन प्रबंधन ने वर्ष 2003 में बाघ राम और सफेद बाघिन रीनी की ब्रीडिंग कराई थी, जिससे बाघिन श्वेता का जन्म हुआ था। श्वेता करीब आठ साल तक जीवित रही।

चिडिय़ाघरों में हो रही सफल ब्रीडिंग
वन विहार प्रबंधन ने जिस बाघ आक्रमक और आदमखोर मानकर इंदौर चिड़ियाघर को दिया था वहां के प्रबंधन ने उस बाघ से ब्रीडिंग कराई। उसकी संतान चिड़ियाघर में घूम रही है। जहां इंदौर चिड़ियाघर में हाल ही में बाघिन ने दो शावकों ने जन्म दिया। वहीं ग्वालियर के चिड़ियाघर में बाघिन जमुना ने शावकों को जन्म दिया है।

वन विहार में बाघों की ब्रीडिंग के प्रयास हो रहे है। पहले बूढ़े बाघ थे। हाल ही में वन विहार को युवा बाघ मिले है। उनके बीच ब्रीडिंग करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस बार बाघों की ब्रीडिंग का प्रोजेक्ट सफल रहेगा।

Friday, December 14, 2018

खड़गे बोले- राफेल पर माफी नहीं मांगेंगे राहुल गांधी, JPC से क्यों डरी सरकार

राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने जेपीसी गठित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी से माफी वाली बीजेपी की मांग को खारिज कर दिया. कांग्रेस ने बीजेपी को चुनौती दी कि अगर उन्हें लगता है कि इस मुद्दे पर राहुल ने कुछ गलत कहा है तो सत्ता पक्ष को उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस देना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. इसी फैसले का जिक्र करते हुए लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष से देश और संसद से माफी मांगने को कहा था.

सत्ता पक्ष की इस मांग के बारे में पूछे जाने पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद भवन परिसर न्यूज एजेंसी भाषा से में कहा, ‘माफी क्यों मांगें? हमने तो सदन में कहा है कि अगर उन्होंने झूठ बोला है तो सत्ता पक्ष विशेषाधिकार हनन नोटिस लाए’

खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान डील की कीमत तय करने पर कुछ नहीं बोला. यह तो एक जनहित याचिका थी, इसका हमसे कोई संबंध नहीं है. कांग्रेस नेता ने कहा कि हम इसे संसद में उठा रहे हैं जो देश की सर्वोच्च संस्था है.

उन्होंने ने कहा कि सरकार को संसद को यह बताना चाहिए कि वह इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) क्यों नहीं बनाना चाहते हैं? जेपीसी तो दोनों सदनों की होती है. पीआईएल के फैसले से यह नहीं कहा जा सकता कि कोई आरोपों से बरी हो गया. सुप्रीम कोर्ट तो केवल उन्हीं मुद्दों की जांच करेगा जो याचिका में उठाये गये हैं. वहीं जेपीसी मुद्दे की व्यापक जांच करेगी. सारी फाइलों पर गौर किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: राफेल पर SC के फैसले के बाद बदला संसद का सीन, लगे 'राहुल गांधी माफी मांगो' के नारे

लोकसभा में शुक्रवार को राफेल मुद्दे पर खड़गे कुछ बोलने के लिए खड़े हुए थे. लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें यह कहते हुए इजाजत नहीं दी कि पहले वह सदन में हंगामा और नारेबाजी कर रहे अपने दलों के सदस्यों को चुप करवायें.

इससे पहले पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं? उन्होंने कहा, "हमने पहले ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट राफेल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता क्योंकि नियमों के तहत उसका दायरा सीमित है, इसलिए हमने कोर्ट का रुख नहीं किया था.

Tuesday, December 11, 2018

华为CFO孟晚舟被捕和中美贸易谈判的幕后较量

上周六,在南美洲阿根廷首都布宜诺斯艾利斯出席G20峰会的习近平与特朗普共进晚餐。两个半小时的交流后,两人敲定中美贸易战暂时“停火”,以及接下来90天的谈判期限。

就在同一天,在北美洲的加拿大城市温哥华,总部设在深圳的世界最大电信设备制造商华为公司首席财务官(CFO)孟晚舟在转机时被当地警方逮捕。加拿大警察称,美国当局正在寻求引渡这位华为创始人千金。

24小时之内,发生了两件对中美关系意义重大却又意味不同的事情,其中的信号耐人寻味。

有分析人士认为,孟晚舟在中美90天谈判开始之际被扣押,从中可以看出美国在谈判中的重点关切,也显示出中美两国间存在的根本分歧。

凯源资本董事总经理陆修泉(Brock Silvers)在接受BBC中文采访时表示,孟晚舟被捕可以视作美国对技术问题关切的再一次体现。他认为,技术一直是美国的最大担忧,贸易问题是其次;而中国过去一直希望通过在贸易上展现灵活性换取美国在技术问题上的让步。如果G20峰会后的停火让中国人以为自己的战略奏效了,那么孟晚舟被捕或许会让北京感到“困惑”。

对比G20峰会后中国舆论的乐观,现在中国各方的言辞似乎激烈了不少。中国外交部要求加拿大和美国立即对羁押孟晚舟的理由作出澄清,同时将其立即释放;代表官方的《人民日报》海外版微信公众号“侠客岛”发表文章表示,今后美国在一些事情上的举动可能会更加“霸道、不可理喻”,中国对美国政府的任何承诺都要“谨慎对待,做两手准备”;《人民日报》旗下的《环球时报》总编辑胡锡进则发布微博称,“美国在市场上打不垮华为,请不要采取卑鄙的流氓手段”。

BBC驻上海记者白洛宾(Robin Brant)在节目中也提到,孟晚舟被捕并非针对个人或个别公司,而是美国司法部门向中国作出的“咄咄逼人”的举动。这一举动显示出美中两国在贸易问题上的意见分歧,且特朗普政府已不想继续容忍他们所认为的违反对伊朗制裁的行为。